Shri Sadguru Satam Maharaj
  1. कण कण में भगवान जतानेवाला चमत्कार

    देवबाग के श्रीकृष्ण डिंगे श्री साटम महाराज के भक्त थे. अक्सर वे श्री महाराज के दर्शन के लिये दाणोली जाते थे. वे कई तीर्थस्थान भी जाते थे. श्री महाराज प्यार से उन्हें शिवम बुलाते थे. एक दिन श्री महाराज ने शिवम से कहा भगवान को ढूँढने के लिये बेकार में जगह जगह क्यों विचरण करते हो, वे तो सब जगह है. सच्चे मन से बुलाओगे तो वे कही भी तुम्हारे सामने प्रकट हो जायेंगे. शिवम ने कहा भगवान मेरे जैसे तुच्छ मनुष्य को क्यों दर्शन देंगे. इसीलिये तीर्थस्थान जा कर अपने आपको मै पवित्र करता हूँ और गंगाजल में स्नान करके अपने पाप धोता हूँ. शिवम का यह कहना था कि श्री महाराज ने अपने पैर आगे कर के कहॉं देखो गंगा यहॉं है और सच में उनके पैरों से जल बह रहा था. यह देखकर वहॉं उपस्थित सब लोग खुशी से फूले नही समाये और गंगाजल बर्तनों मे इकठ्ठा करने लगे. भीगी आँखों से शिवम ने श्री महाराज के पैरों मे सर झुकाया.

  2. भरोसा हो तो किसी बीमारी का इलाज संभव है जतानेवाला चमत्कार

    श्री दाजीबा बोंगार को कुष्ठरोग था. अनेक डॉक्टरों की दी हुई तरह तरह की दवाएं खाकर भी वे ठीक न हुए. तंग आकर उदासी मे वे अपनी जान देने तक के लिये तैयार हो गए. अंत मे मित्रों की सलाह मानकर वे श्री महाराज की शरण मे गये और सच्चे मन से अपने आप को उनके सुपुर्द कर दिया. श्री महाराज ने उन्हें एक अनोखा तेल उंगली पर लगाने के लिये दिया. श्री महाराज पर भरोसा रखते हुए उन्होने वो तेल अपनी उंगली पर लगाया. उंगली ठीक होने लगी, धीरे धीरे उनके पूरे शरीर को कुष्ठरोग से मुक्ति मिल गयी. दाजीबा श्री महाराज के कृतज्ञ थे तथा उनके सच्चे भक्त बन गये.

  3. भक्त का उद्धार करनेवाला चमत्कार

    पांडुरंग दाडकर बापुसाहेब सरकार के साथ काम करते थे, जो उनके काम के साथ खुश भी थे. अक्सर दाडकर बापुसाहेब के साथ श्री महाराज के दर्शन के लिये जाया करते थे. धीरे धीरे वे श्री महाराज के घनघोर भक्त बन गये. अपने घर में अक्सर वे श्री महाराज के चित्र को सदैव निहारते रहते थे. एक बार सावंतवाडी मे मलेरिया का प्रकोप हुआ. दाडकर भी उसकी चपेट मे आये. एक महिने तक वे बिस्तर पर पडे रहे. मलेरिया के वजह से वे श्री महाराज के दर्शन नही कर पा रहे थे, वह दर्शन के लिये तडप रहे थे. एक रात उनके सपने मे श्री महाराज पधारे. मालवणी भाषा मे उनसे बोले मै तुम्हारी सेहत जानने आया हुँ, काफी समय से तुम मुझे याद कर रहे हो, अब चिंता मत करो. तुम्हारी तकिया के नीचे मैने राख और एक गोली रखी है, उसे खा लेना तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे. आँख खुलने पर दाडकर पसीने से तर थे. तकिया के नीचेसे राख और गोली निकाल कर गोली खा ली. उनकी पत्नी को चिंता हुई, पता नही कैसी गोली है, कहीं जहर तो नही. जब दाडकर ने उन्हें अपना सपना बताया तब तसल्ली हुई. उस गोली से दाडकर मलेरिया से मुक्त हो गये.

  4. पिशाच के प्रकोप से छुटकारा दिलानेवाला चमत्कार

    बापुसाहेब ने अपने सहयोगी श्री सबनीस को श्री महाराज से मिलवाया. कुछ समय मे श्री तथा श्रीमती सबनीस उनके अनुयायी बन गये. सबनीस दम्पति के पास धन दौलत की कमी नहीं थी लेकिन पुत्र लाभ से वे वंचित थे. इस कारण वे बहुत दुखी थे. ऐसा नही था कि बच्चे होते नही थे बल्कि होने के कुछ समय बाद ही मर जाते थे. आखिर उन्होने श्री महाराज की शरण लेने का निश्र्चय किया. इर इरादे से उन्हें अपने घर पधारने की याचना की. एक दिन उनके आग्रह पर श्री महाराज श्री सबनीस के घर आये. जब उस दम्पति ने श्री महाराज को अपना दुख बताया तो वे यकायक बहुत क्रोधित हो गये. क्रोधपूर्वक उन्होने अपनी दृष्टि घर के बाहर के पीपल के पेड पर डाली. देखते ही देखते पेड जलकर राख हो गया और पेड मे रहनेवाला शैतान नष्ट हो गया. यह शैतानही सबनीस परिवार मे किसी बच्चे को जिंदा रहने नही देता था. शैतान का विनाश होने के बाद सबनीस दम्पति को पुत्र प्राप्ति हुई जो जीवित रहा. इस तरह श्री महाराज की कृपासे सबनीस परिवार मे खुशियों का आगमन हुआ.

  5. पद का मद चूर करनेवाला चमत्कार

    श्री महाराज अक्सर दाणोली के आसपास के गॉंवो मे नंगे घूमते रहते थे. जो लोग उनकी आध्यात्मिक शक्तियों से परिचित न थे वे उन्हें पागल समझकर उनका मजाक उडाते लेकिन श्री महाराज पर उनका कोई असर न होता. एक दिन श्री महाराज निर्वस्त्र विचरण कर रहे थे. एक घर की सीढी पर बैठा एक बच्चा जो संतान सुख से वंचित पुलिस इन्स्पैक्टर और उसकी पत्नी का भतीजा था. महाराज को देखकर जोर जोर से चिल्लाने लगा. शोर सुनकर बच्चे की चाची, जो रसोई में दूध उबाल रही थी बाहर आयी. वही श्री महाराज को पहचान गयी और उनके चरणों में सर झुका कर उनका स्वागत किया. श्री महाराज ने उससे कहा कि जो दूध तुम उबाल रही हो मुझे पिलाओ. चाची ने आज्ञा का पालन तो किया लेकिन सोचने लगी कि श्री महाराज को कैसे पता चला कि मैं दूध उबाल रही थी. श्री महाराज ने एक ही घूंट में वह गर्म दूध का ग्लास खाली कर दिया. इतने मे पुलिस इन्स्पैक्टर घर वापस लौटा और एक नंगे आदमी को अपनी पत्नी के सामने देखकर तैश में आकर उसने श्री महाराज को तुरंत वहॉं से जाने को कहा. लेकिन उन्होंने उसकी बात अनसुनी कर दी. इन्स्पेक्टर को बहुत गुस्सा आया और गुस्से मे उसने नंगे आदमी की पिटाई करने के लिये बेंत उठाई. उसके पहले कि इन्स्पैक्टर उन्हें मार सके श्री महाराज ने अपनी चारों तरफ जमीन पर एक घेरा खींच दिया. मारने के लिये हाथ में बेंत उपर उठायें इन्स्पैक्टर तुरंत मूर्ति की तरह भारी हो गया. जब उसकी पत्नी ने यह देखा तो समझ गई कि पद का मद में चूर उसके पति ने श्री महाराज का अपमान किया है. उसने गिडगिडाकर उनसे अपने पति के बुरे व्यवहार के लिये क्षमा मांगी. श्री महाराज ने अपने चारों तरफ एक और घेर खींचा लेकिन उल्टी दिशा में और इन्स्पैक्टर जीवित हो गया. उसकी पत्नी ने उसे पूरी बात बताई तथा श्री महाराज से अवगत कराया. अपनी गल्ती के लिये इन्स्पैक्टर ने श्री महाराज से क्षमायाचना की. श्री महाराज ने खुश होकर उन दोनों को संतान सुख का आशिर्वाद दिया. कुछ समय बाद उनके घर में संतान ने जन्म लिया.

  6. अजीब आचरण के पीछे छिपी करुणा दर्शानेवाला चमत्कार

    श्री सहदेव कोचरेकर काफी सालों से सरदर्द से परेशान थे. अनेक डॉक्टरोंद्वारा बताई गई तरह तरह की दवाओं पर पानी की तरह पैसा बहाने के बाद अब वे निराश हो चुके थे. आशा कि किरण जगी जब किसी मित्र ने बताया कि श्री साटम महाराज उसे सरदर्द से छुटकारा दिला सकते है. मजा लेने के लिये दोस्त ने कहा साथ में एक ब्रान्डी की बोतल भी लेते जाना. यह सुनकर श्री कोचरेकर ब्रान्डी की बोतल लेकर श्री महाराज की सेवा में उपस्थित हुए. आदरपूर्वक नतमस्तक हुए ही थे कि श्री महाराज ने कहा कि जेब से बोतल निकालकर मुझे दे दो. कोचरेकर चकित रह गये कि श्री महाराज को कैसे पता कि वे जेब में ब्रान्डी की बोतल लेकर आए है. जैसे ही कोचरेकर ने बोतल दी, श्री महाराज ने बोतल उनके सर पर दे मारी. देखनेवाले और कोचरेकर स्वयं दंग रह गये तभी उनको महसूस हुआ कि उनका सरदर्द ठीक हुआ है, और तो और सर पे बोतल से लगा घाव भी तुरंत भर गया है.


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